पितृ दोष के लक्षण — स्वयं पहचानें
1. चिन्ता और रोग से लगातार धन हानि होने लगती है।
2. अच्छी कमाई और धन होने पर भी बचत नहीं हो पाती।
3. पुत्र या पुत्री, शिक्षित और आत्मनिर्भर होने पर भी, उनके विवाह में देरी या बाधाएँ आने लगती हैं।
4. मन में एक अनजाना भय हमेशा बना होना पितृ दोष की निशानी है।
5. जीवन में सब सुख-सुविधा होने के बावजूद भी किसी भी कार्य में मन नहीं लगता है।
6. डॉक्टरी जाँच में सब कुछ नॉर्मल होने पर भी जब संतान न हो|
7. घर में कलह-क्लेश का बोलबाला हो |
8. मुकदमों के कारण धन, समय एवं स्वास्थ्य की हानि हो रही हो।
पितृ दोष से संबंधित एक धार्मिक उपाय :-----
यदि किसी घर में पितृ दोष माना जाता है, तो हर अमावस्या को भगवद्गीता के सातवें अध्याय का पूरा पाठ करने और उसके माहात्म्य की कथा पढना चाहिए । इसके लिए किसी पंडित को बुलाना आवश्यक नहीं है; व्यक्ति स्वयं यह पाठ कर सकता है।
उपाय -
- अमावस्या के दिन भगवद्गीता के सातवें अध्याय का पूरा पाठ करें।
- पहले से एक लोटे में जल भरकर रखें।
- पाठ पूरा होने के बाद उस जल को लेकर खुले स्थान में सूर्य देव के सामने जाएँ।
- सूर्य को देखते हुए प्रार्थना करें कि दिवंगत पूर्वजों की आत्माओं की शांति के लिए गीता पाठ का पुण्य उन्हें अर्पित किया जा रहा है।
- इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- यह पाठ एवं प्रार्थना हर अमावस्या को करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।